ये वही मोड़ है, हम मिले थे जहाँ
तुमसे पहली दफ़ा, याद है?
कुछ क़दम थे चले हमसफ़र की तरह
आज भी वो घड़ी साथ है
ख़ुश-नुमा शाम थी बस तेरे नाम की
है क़ाफ़िला ख़्वाब का आँखों में ठहरा हुआ
मेरे दिन-रात में ज़िक्र है बस तेरा
और तुझी से सभी रंग हैं
ज़िंदगी में कमी ना रही, साथिया
इस तरह तू मेरे संग है
देखता हूँ जिधर, तू ही आए नज़र
है क़ाफ़िला प्यार का साँसों में ठहरा हुआ
हर दुआ है मेरी बस तेरे ही लिए
तू ही आग़ाज़-ओ-अंजाम है
इस जहाँ से मेरा रिश्ता कोई नहीं
इक तुझी से मुझे काम है
बेख़बर ये ज़मीं, बेख़बर आसमाँ
है क़ाफ़िला प्यार का साँसों में ठहरा हुआ





