ये तो नहीं थी वो सुबह जो
रातों को जिसकी ख़ातिर चले
कटता नहीं है ये रास्ता लो
होते नहीं कम ये फ़ासले
पर कम ना होंगे, बढ़ते रहेंगे
ये हौसले, ये हौसले
ये हौसले, ये हौसले
ये तो नहीं थे वो सवेरे
रातों को जिसकी ख़ातिर जगे
मिल के मिटाए जिसके अँधेरे
हमने जलाए दिल के दीए
अब कम ना होंगे, बढ़ते रहेंगे
ये हौसले, ये हौसले
ये हौसले, ये हौसले
आ गए हम उस जहाँ जहाँ पे झुकता है आसमाँ
आ गए हम उस जहाँ जहाँ पे रुकता है ख़ुदा
आए सभी पे वार के तेरे दिल से सलामियाँ
आए सभी पे वार के तेरे दिल से सलामियाँ




