चुनरी सम्भाल गोरी,
उड़ी चली जाए रे
चुनरी सम्भाल गोरी,
उड़ी चली जाए रे
मार ना दे डंक कहीं,
नज़र कोई हाय
चुनरी सम्भाल गोरी,
उड़ी चली जाए रे
मार ना दे डंक कहीं,
नज़र कोई हाय
देख देख पग न फिसल जाए रे
रा-रा-रर-रर (आह)
चुनरी सम्भाल (आह)
उड़ी चली जाए (आह)
मार ना दे डंक (आह)
नज़र कोई हाय
लै-लै-ला
लै-लै-ला
आह
फिसलें नहीं चल के,
कभी दुख की डगर पे
ठोकर लगे हँस दें,
हम बसने वाले, दिल के नगर के
हाय-हाय
फिसलें नहीं चल के,
कभी दुख की डगर पे
ठोकर लगे हँस दें,
हम बसने वाले, दिल के नगर के
अरे, हर कदम बहक के सम्भल जाए रे!
आरा-रा-रा-रा (आह)
चुनरी सम्भाल (आह)
उड़ी चली जाए (आह)
मार ना दे डंक (आह)
नज़र कोई हाय
किरणें नहीं अपनी,
तो है बाहों की माला
दीपक नहीं जिन में,
उन गलियों में हैं हमसे उजाला
हाय, हाय
किरणें नहीं अपनी,
तो है बाहों की माला
दीपक नहीं जिन में,
उन गलियों में हैं हमसे उजाला
अरे, धुल ही पे चाँदनी खिल जाए रे!
आरा-रा-रा-रा (आह)
चुनरी सम्भाल (आह)
उड़ी चली जाए (आह)
मार ना दे डंक (आह)
नज़र कोई हाय
पल छिन पिया पल छिन,
अँखियोंका अंधेरा
रैना नहीं अपनी,
पर अपना होगा कल का सवेरा
हाय, पल छिन पिया पल छिन,
अँखियोंका अंधेरा
रैना नहीं अपनी,
पर अपना होगा कल का सवेरा
अरे, रैन कौन सी जो न ढल जाए रे!
आरा-रा-रा-रा (आह)
चुनरी सम्भाल (आह)
उड़ी चली जाए (आह)
मार ना दे डंक (आह)
नज़र कोई हाय





