पालना है बादलों का, तकिया चाँद का
पालना है बादलों का, तकिया चाँद का
ओढ़ने को तारों से जड़ा ये आसमाँ
तेरा माथा चूम के सुनाऊँ मैं तुझे
परियों की कहानी, जुगनुओं की दास्ताँ
हो, काले अँधेरे ये तुझे छू ना पाएँ
झिलमिल चाँदनी मैं छिड़क दूँ ज़रा
हो, झीने से आँचल में तुझे मैं सहेजूँ
मोती सीपियों में रहे जिस तरह
झींगुरों की सरगमों से धुन बना के मैं
झींगुरों की सरगमों से धुन बना के मैं
घोल दूँ हवा में अनसुनी सी लोरियाँ




