राधा रमण हरि गोविंद जय
बोले रे मन, "हरे कृष्ण हरे"
राधा रमण हरि गोविंद जय
बोले रे मन, "हरे कृष्ण हरे"
हे मेरे गिरिधर, हे गोपाला
हे मेरे गिरिधर, हे गोपाला
तू ही दुख दूर करे
हरे कृष्ण हरे, हरे कृष्ण हरे
हरे राम हरे, हरे कृष्ण हरे
अँधेरों में जलते दीए सा
साँचा तेरा नाम रे कान्हा, साँचा तेरा नाम
चाँदी-सोने से भी खरा है
एक मेरा घनश्याम जगत का, एक मेरा घनश्याम
आन पड़ी मैं, द्वार खड़ी मैं
आन पड़ी मैं, द्वार खड़ी मैं
तू ही दुख दूर करे
हरे कृष्ण हरे, हरे कृष्ण हरे
हरे राम हरे, हरे कृष्ण हरे
हरे कृष्ण हरे, हरे कृष्ण हरे
हरे राम हरे, हरे कृष्ण हरे
हरे कृष्ण हरे, हरे कृष्ण हरे
हरे राम हरे, हरे कृष्ण हरे
हरे कृष्ण हरे, हरे कृष्ण हरे
हरे राम हरे, हरे कृष्ण हरे





