बना के मंज़िल मुझको, कहीं भटक ना जाना तुम
मिलेंगे लाखों आशिक़, कहीं बहक ना जाना तुम
बना के मंज़िल मुझको, कहीं भटक ना जाना तुम
मिलेंगे लाखों आशिक़, कहीं बहक ना जाना तुम
ये तेरा दिल, हाय, तेरा दिल
तुम इसको देने से ना घबराना
सजा के ख़ुद को...
सजा के ख़ुद को मेरे लबों पे
कहीं पिघल ना जाना, सनम
बदल के मेरी तुम ज़िंदगानी
कहीं बदल ना जाना, सनम
ये मेरा दिल, हाय, मेरा दिल
हाय, दिल लेकर मुझको ना बहलाना
चुरा लिया...
चुरा लिया है तुमने जो दिल को
नज़र नहीं चुराना, सनम
सजाऊँगा लुट कर भी तेरे बदन की डाली को
लहू जिगर का दूँगा हसीं लबों की लाली को
सजाऊँगा लुट कर भी तेरे बदन की डाली को
लहू जिगर का दूँगा हसीं लबों की लाली को
है वफ़ा क्या, इस जहाँ को
एक दिन दिखला दूँगा मैं दीवाना
चुरा लिया...
चुरा लिया है तुमने जो दिल को
नज़र नहीं चुराना, सनम
बदल के मेरी तुम ज़िंदगानी
कहीं बदल ना जाना, सनम
ले लिया दिल, हाय, मेरा दिल
हाय, दिल लेकर मुझको ना बहलाना
चुरा लिया...
चुरा लिया है तुमने जो दिल को
नज़र नहीं चुराना, सनम





