ऐ ज़िंदगी, धीरे से चल
ऐ ज़िंदगी, धीरे से चल
कहीं हाथों से ना लमहा फिसल जाए
कहीं ऐसा ना हो, छू के गुज़र जाए
खुल के तुझ को गले लगा लूँ
ज़रा थम जा
ऐ ज़िंदगी, धीरे से चल
कहीं हाथों से ना लमहा फिसल जाए
कहीं ऐसा ना हो, छू के गुज़र जाए
खुल के तुझ को गले लगा लूँ
ज़रा थम जा
ऐ ज़िंदगी, धीरे से चल
तारों भरी इस रात में चाँद ज़रूरी है
तेरा मेरे पास यहाँ होना ज़रूरी है
तुम्हें अपनी आँखों से मैं छूऊँगा तो चैन आएगा
कहीं ऐसा ना हो आधा ही रह जाए
ख़ाब मेरा कहीं ख़ाली ना घर जाए
खुल के तुझ को गले लगा लूँ
ज़रा थम जा
ऐ ज़िंदगी, धीरे से चल
बरसों से मैं तेरे प्यार में
रोता भी हूँ, हँसता भी हूँ
कभी काश कुछ ऐसा भी हो
तू भी मेरे लिए दो बूँद रो जाए
तेरी बातों में जो मेरा ज़िकर आए
खुल के तुझे गले लगा लूँ
ज़रा थम जा
ऐ ज़िंदगी, धीरे से चल

