तुम मेरे हो, बस मेरे ही मेरे हो
तुम मेरे हो, बस मेरे ही मेरे हो
तुम मेरे हो, बस मेरे ही मेरे हो
पूछ लो हवाओं से
सुरमई घटाओं से
बारिशों के पानी से
पूछो नदिया दीवानी से
तुम मेरे हो, बस मेरे ही मेरे हो
तुम मेरे हो, मेरे ही मेरे हो
बेताबी का आलम है
और मौसम भी है सर्द
बेताबी का आलम है
और मौसम भी है सर्द
हल्की-हल्की बेहोशी
और मीठा-मीठा दर्द
पूछ लो बहारों से
चंपई नज़ारों से
ख़ुशबुओं की वादी से
पूछो इस रुत शहज़ादी से
तुम मेरे हो, बस मेरे ही मेरे हो
तुम मेरे हो, बस मेरे ही मेरे हो
मैं तुम को महसूस करूँ
बन जाओ तुम एहसास
एक-दूजे को देख ना पाए
आ जाओ, इतने पास
पूछ लो ख़यालों से
बादलों की शालों से
ख़ाहिशों से, सपनों से
पूछो ग़ैरों या अपनों से
तुम मेरे हो, बस मेरे ही मेरे हो
तुम मेरे हो, बस मेरे ही मेरे हो





