अगर ख़ुदा ने बनाया है दर्द
तो कोई हमदर्द भी बनाया होगा
अगर लिखा क़िस्मतों में सफ़र
तो कोई हमसफ़र भी आया होगा
खोल दिल के दर
दहलीज़ पर इश्क़ को आने दे
दो दिन की ज़िंदगी में
१०० साल वाली मोहब्बत हो जाने दे
इक दिन पूछा उस ख़ुदा से
कहते हैं, तेरे आसमाँ पे
होता है फ़ैसला दिल के रिश्तों का
फिर माँगा मैंने ये दुआ में
दे-दे इक दिल तेरे जहाँ से
चुपके से दे दिया रब ने तेरा पता
भूल सारे ग़म
जी उठे हैं हम तुझको ही पाने से
दो दिन की ज़िंदगी में
१०० साल वाली मोहब्बत हो जाने दे
अगर रब ने बनाया है दिल
तो कोई दिलबर भी बनाया होगा
अगर लिखा क़िस्मतों में है ग़म
तो कोई हमदम भी आया होगा
ओ, यारा, मैंने तुझे चाहा नहीं था
पर धूप किनारा यहीं था
आया तू ऐसे इक दिन दिल की बस्ती में
आँसुओं से तूने नाम लिखा था
तेरा होना, मेरा काम लिखा था
बन बैठे हम तो राही तेरी कश्ती के
थी जो आँख नम
मिट गए वो ग़म इक तेरे ही आने से
दो दिन की ज़िंदगी में
१०० साल वाली मोहब्बत हो जाने दे





