फूलों के रंग से, दिल की कलम से
तुझको लिखी रोज़ पाती
कैसे बताऊँ, किस-किस तरह से
पल-पल मुझे तू सताती
तेरे ही सपने ले कर के सोया
तेरी ही यादों में जागा
तेरे ख़यालों में उलझा रहा यूँ
जैसे के माला में धागा
हाँ, बादल-बिजली, चंदन-पानी जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें कई-कई बार
हाँ, इतना मदिर, इतना मधुर तेरा-मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें कई-कई बार
साँसों की सरगम, धड़कन की बीना
सपनों की गीतांजली तू
मन की गली में महके जो हर-दम
ऐसी जूही की कली तू
छोटा सफ़र हो, लंबा सफ़र हो
सूनी डगर हो या मेला
याद तू आए, मन हो जाए
भीड़ के बीच अकेला
हाँ, बादल-बिजली, चंदन-पानी जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें कई-कई बार
हाँ, इतना मदिर, इतना मधुर तेरा-मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें कई-कई बार
पूरब हो पच्छिम, उत्तर हो दक्खिन
तू हर जगह मुस्कुराए
जितना ही जाऊँ मैं दूर तुझसे
उतनी ही तू पास आए
आँधी ने रोका, पानी ने टोका
दुनिया ने हँस कर पुकारा
तस्वीर तेरी लेकिन लिए मैं
कर आया सब से किनारा
हाँ, बादल-बिजली, चंदन-पानी जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें कई-कई बार
हाँ, इतना मदिर, इतना मधुर तेरा-मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें कई-कई बार
कई-कई बार
कई-कई बार





