यारों से करो याराना
यारों के लिए बस जीना
लिखा अफ़साना यारी का
जब college था वो ज़माना
यारों से करो याराना
यारों के लिए बस जीना
लिखा अफ़साना यारी का
जब college था वो ज़माना
दिन थे वो बेफ़िक्ररी के
लंबी ना थी कभी वो रातें
करते थे हम यूँ ही सारी बातें
ख़त्म ना होते मुलाक़ातें
दिन थे वो बेफ़िक्ररी के
लंबी ना थी कभी वो रातें
करते थे हम यूँ ही सारी बातें
ख़त्म ना होते मुलाक़ातें
ना थे शर्तें, थे ना उसूल
दोस्ती में हर ग़ुनाह क़ुबुल
ख़्वाबों-ख़्यालों में दोस्त का जज़्बा
यारों के लिए हर लमहा
ज़ेबें होती थी तभी बस खाली
यारों से भरी थी खुशियों की झोली
रुस्वाई, लड़ाई थी हमें प्यारी
बढ़ती थी उनसे ही अपनी यारी
यारों से करो याराना
यारों के लिए बस जीना
लिखा अफ़साना यारी का
जब college था वो ज़माना
नी-नी सा नी स ग रे
नी-नी सा नी स म ग रे
खोजूँ कहाँ अभी वो दोस्ताना?
गया कहाँ वो याराना?
पल-पल बीते उनके जो साथ
धूप हो या फिर बरसात
भरके खाली हैं यारों का प्याला
कहाँ हैं अब वो दोस्तों का मेला?
रह गई यादें बस अब दिल में
फिर आऐंगें ना कभी वो लमहें
यारों से करो याराना
यारों के लिए बस जीना
लिखा अफ़साना यारी का
जब college था वो ज़माना
दिन थे वो बेफ़िक्ररी के
लंबी ना था कभी वो रातें
करते थे हम यूँ ही सारी बातें
ख़त्म ना होते मुलाक़ातें
दिन थे वो बेफ़िक्ररी के
लंबी ना था कभी वो रातें
करते थे हम यूँ ही सारी बातें
ख़त्म ना होते मुलाक़ातें



