चल ढूँढे आज इक रस्ता यूँ
चल ढूँढे आज इक रस्ता यूँ
जहाँ लम्हें हैं तुझपे फ़िदा
भुला दे उन सारे सपनों को
बस इस पल की तू कर आज परवाह
ख़ुशियों की फुलझड़ी हो लाए इस घड़ी
तेरे यारों से बनती ये शाम
ये शाम फिर ना लौटगी, फिर ना आएगी ये शाम
याद आए तो रख लेना तुम, अपने चेहरे पे एक मुस्कान
बेख़बर जब हम घूमें, बेअसर हैं ये दूरियाँ
जैसे बंधन से सारे ग़म खुले मुस्कुराहटों का जहाँ
अब तो मिलती हैं सारी राहें, जहाँ खुलती हैं दोनों बाहें
लगता है जैसे अब जन्नत और कहाँ
ये शाम फिर ना लौटगी, फिर ना आएगी ये शाम
याद आए तो रख लेना तुम, अपने चेहरे पे एक मुस्कान
टूटे जो तेरा दिल कभी वो यादें गूँजें मन में
हँसने पे मजबूर करें ऐसी यादें दी किसने?
गुज़रे ना लम्हें अब अपने, जो तेरे यार हैं संग तेरे
अधूरा हो ना जाए फिर ये जहाँ
ये शाम फिर ना लौटगी, फिर ना आएगी ये शाम
ये शाम फिर ना लौटगी, फिर ना आएगी ये शाम
याद आए तो रख लेना तुम, अपने चेहरे पे एक मुस्कान

