सखी रे मेरा मन उलझे, तन डोले
सखी रे मेरा मन उलझे, तन डोले
...मन उलझे, तन डोले
अब चैन पड़े तब ही जब उन से मिलन हो ले
सखी रे मेरा मन उलझे, तन डोले
सखी रे मेरा मन उलझे, तन डोले
लाख जतन करूँ ध्यान बटे ना
ये रसवंती रैन कटे ना
लाख जतन करूँ ध्यान बटे ना
ये रसवंती रैन कटे ना
पवन अगन सी घोले
अब चैन पड़े तब ही जब उन से मिलन हो ले
सखी रे मेरा मन उलझे, तन डोले
सखी रे मेरा मन उलझे, तन डोले
साँस भी लूँ तो आँच सी आए
चंचल काया पिघली जाए
साँस भी लूँ तो आँच सी आए
चंचल काया पिघली जाए
अधरों में तृष्णा बोले
अब चैन पड़े तब ही जब उन से मिलन हो ले
सखी रे मेरा मन उलझे, तन डोले
सखी रे मेरा मन उलझे, तन डोले


