दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं
ज़ुर्म सिर्फ इतना है
ज़ुर्म सिर्फ इतना है, उनको प्यार करते हैं
ऐतबार बढ़ता है और भी मोहब्बत का
ऐतबार बढ़ता है और भी मोहब्बत का
जब वो अजनबी बनकर पास से गुज़रते हैं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं
वो जो फेरकर नज़रें पास से गुज़रते हैं
(वो जो फेरकर नज़रें पास से गुज़रते हैं)
ऐ, ग़म-ए-ज़माना हम तुझको याद करते हैं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं
(दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं)
ज़ुर्म सिर्फ इतना है, उनको प्यार करते हैं



