पत्थर है वो मुझे रोक टोक
कहते है लोग पर मोम सा है मेरा जानू
नश्तर है वो यही दूर दूर तक गूंजे फितूर
पर बादशाह है मेरा जानू
हो कड़वी है बोली दिल है रंगोली
इसमें पत्थर क्यों लोग देखते हैं
मुझको तो दिखता है इसमें कोई सनम
अंगारों का अंबर सा लगता है मेरा सामी
मेरी राहों में फूलों का रस्ता है मेरा सामी
हो आग देखी ताब देखी इसकी आँखों में सबने
आब देखा ख्वाब देखा इसकी आँखों में हमने
इसकी मूछों में बला की देखी है शान सबने
पर इन्ही मोछों के पीछे देखी मुस्कान हमने
शेरों की अगर रफ्तार हो इसकी
रहती है उस पे सब की नज़र
सो जाए जब सर गोद में रख कर
इसकी थकान का श्रीवल्ली को हो खबर
अंगारों का अंबर सा लगता है मेरा सामी
मेरी राहों में फूलों का रस्ता है मेरा सामी
हो महंगे महंगे बांटे तोहफे ये है इसकी नवाबी
मुझ से डर डर के ये मांगे एक झप्पी गुलाबी
मसला कितना भी हो मुश्किल चुटकियों में करे हल
कुर्ता इसका ना मिले तो मांगे मुझसे ये पागल
घर से अलग बाहर की ये दुनिया
झुकती रहे इसके आगे
पर जब जब घर से निकले
माथे पे तिलक मुझ से आके मांगे
अंगारों का अंबर सा लगता है मेरा सामी
ऐसा घरवाला मिल जाए तो घरवाली महारानी





